प्रत्नकीर्तिमपावृणु = कर प्रयत्न; कि पुरखों की थाती, पहुंचे उनकी सन्ततियों तक.

प्रत्नकीर्ति : षाण्मासिक समीक्षित शोध-पत्रिका, ISSN 2322-0694


भाग-1 अंक-3, July-September 2014
आत्मनिवेदन
लेख
  1. Sanskrit influence on Dakhani Masnavi ‘Kadam Rao Padam Rao’
Shaikh Abdul Ghani
  1. भाषावृत्तिपंजिका-कृत् मैथिलविद्वान् ‘विश्वरूपोपाध्यायः’
प्रियव्रत मिश्र
  1. कालिदास और वन्यजीव-संरक्षण-परक उनका दृष्टिकोण
पुष्कर आनन्द
  1. संस्कृत
उर्दू - मौलाना शिबली नोमानी, हिन्दी - राजेश सरकार
  1. ‘विजयिविजयम्’: जगन्नाथ-प्रणीत संस्कृत का एक अज्ञात नाटक
प्रताप कुमार मिश्र
  1. तुलसीदास का रामकथा-श्रवण-स्थल ‘कुरखेत’ या ‘सूकरखेत’?
उदय शंकर दुबे
विविधा
समकालीन पत्रिकाएं : शोध-सन्दर्भ
कृति-परिचय
  1. महाकवि भास-रचित ‘कर्णभारम्’ का उर्दू अनुवाद
राजेश सरकार
प्रत्नकीर्ति प्राच्य शोध संस्थान
आराजी-469, सत्यम् नगर, भगवानपुर, लंका, वाराणसी, उ. प्र., भारत, पिन-221005