प्रत्नकीर्तिमपावृणु = कर प्रयत्न; कि पुरखों की थाती, पहुंचे उनकी सन्ततियों तक.

प्रत्नकीर्ति : षाण्मासिक समीक्षित शोध-पत्रिका, ISSN 2322-0694


भाग-1 अंक-1, January-March 2014
आत्मनिवेदन
लेख
  1. आचार्य कवि मोहन लाल मिश्र रचित ‘रामचरित बालचन्द्रिका’
उदय शंकर दुबे
  1. बीसवीं शताब्दी की अज्ञात लिपि - ‘ताराक्षरविद्या-वर्णमाला’
राजीव कुमार त्रिगर्ती
  1. अच्युतराय मोदक (1778-1828 ई.) - कृत ‘आर्याशतकम्’ की अज्ञात एवं दुर्लभ पाण्डुलिपि
प्रवीण कुमार मिश्र
  1. अद्वैतयति के आश्रयदाता ‘प्रताप शाह’ और ‘राघवोल्लासमहाकाव्यम्’ का रचना-काल
प्रताप कुमार मिश्र
विविधा
  1. तुलसी-दास के नाम पर मन्त्र की रचना
उदय शंकर दुबे
  1. ‘पृथ्वीराजविजयमहाकाव्यम्’ के प्रणेता पर कुछ आवश्यक टिप्पणियाँ’
प्रताप कुमार मिश्र
समकालीन पत्रिकाएं : शोध-सन्दर्भ
  1. संगमनी, (संस्कृत-शोध-त्रैमासिकी, इलाहाबाद), भाग-41, संख्या : 1-4 ‘पृथ्वीराजविजयमहाकाव्यम्’ का पुनः प्रकाशन
सम्पादक
कृति-परिचय
  1. अद्वैतयति-कृत ‘राघवोल्लासमहाकाव्यम्’ (तुलसीदास-समकालीन संस्कृत का एक विलक्षण महाकाव्य एवं उसका प्रकाशन)
प्रताप कुमार मिश्र
प्रत्नकीर्ति प्राच्य शोध संस्थान
आराजी-469, सत्यम् नगर, भगवानपुर, बी.एच.यू., वाराणसी, उ. प्र., भारत, पिन-221005