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अनूदित साहित्य शृंखला, संख्या-३


  • औरत या शेर ? (संस्कृत अनुवाद)
  • उर्दू अफ़साना : मुफ़्ती मोहम्मद अनवर इक़बाल
  • संस्कृत अनुवाद : श्वेतकेतु
  • प्रथम संस्करण - 2021 ई.
  • 32 पृष्ठ
  • नागरी-लिपि में उर्दू पाठ सहित
  • ISBN: 978-81-906145-9-7 (P.B.)
Price: 60/-

‘औरत या शेर?’ उर्दू की एक लघुकथा है जो कि मूलतः माहनामा ‘मख़्ज़न’; (लाहौर से प्रकाशित होने वाली एक विश्रुत उर्दू-पत्रिका) के मार्च-1927 ई. वाले अंक में प्रकाशित हुयी थी। कहानी के लेखक मुफ़्ती मोहम्मद अनवर इक़बाल उस दौर के प्रसिद्ध लेखकों में से थे, जिन्होंने मख़्ज़न के लिए कुछेक कहानियाँ, कुछेक संस्मरणात्मक लिखे।

अपनी प्रविधि और शिल्प के कारण महज़ १०-१२ पृष्ठों की यह कहानी उर्दू-साहित्य की एक विशिष्ट कृति कही जा सकती है, मगर अफ़सोस कि इसका चर्चा अदबी हलक़े में उतना नहीं हो सका जितने की यह हक़दार थी। ख़ुद उर्दू-साहित्य के इतिहास में इस मुख़्तसर अफ़साने का ज़िक्र नदारद है। समीक्षा, आलोचना-परक ग्रन्थों में भी कहीं इसका हवाला नहीं।

कहने को तो यह कहानी उर्दू भाषा और लिपि में लिखी और छापी गई, मगर पढ़ने वालों को यह जान कर आश्चर्य होगा कि कहानी का प्लॉट प्राग्वैदिक काल से उठाया गया है। ग़ौर से पढ़िए और गुनिये तो मालूम होगा कि कहानी की कथा-वस्तु बृहत्तर भारत के मध्यवर्ती इलाक़ों में आर्यों के स्थापित होने के काल से सम्बन्ध रखती है। कहानी का नायक द्रविड-जाति का एक बर्बर, अर्ध-सभ्य राजा है और वह पृथु का समकालीन, पड़ोसी और प्रतिद्वन्द्वी है। हालाँकि कहानी के लिखने वाले ने यह नहीं बताया है कि उसने इसका प्लॉट कहाँ से लिया मगर यदि यह प्लॉट सच्चा है तो इसके मूल की ख़ोज कहीं वैदिक आख्यानों, उपाख्यानों में किए जाने की सख़्त ज़ुरूरत है।

कहानी दो मुहब्बत करने वाले आशिक़ो माशूक़ के दिली जज्बात, मानसिक तथा भावनात्मक स्थितियों पर केन्द्रित है। एक नौजवान, हसीन, बुलंदहौसदा, बहादुर और दुर्दान्त योद्धा जो कि मंत्रिमंडल का सदस्य भी था; अपने ही साम्राज्य की राजकुमारी के प्रेमजाल में फँसता है और कुछ दिनों तक दोनों इस प्रेम का आनन्द उठाते हैं। एक वह दिन भी आया कि यह प्रेम उस बर्बर और नीम-वहशी राजा पर प्रकट हुआ। राजा ऐसे मामलों का निबटारा जो कि निहायत उसे प्रिय होते या दरबार में जिनके निबटाने से कुछ ख़ास लुत्फ़ न होता, अपने ही बनाए एक विशाल रणभूमि में किया करता था। क़ैदी नौजवान रणभूमि में आया। यहाँ दस्तूर के मुताबिक़ उसे एक जैसे लगने वाले दो दरवाज़ों में से एक दरवाज़ा बेझिझक खोलना था।

इन दरवाज़ों में एक के पीछे इस देश, साम्राज्य की सबसे कम उमर की सबसे सुन्दर युवती होती और दूसरे दरवाज़े के पीछे इस देश दुनिया का सबसे ख़ून-ख़्वार शेर। रणभूमि में राजा के अभिवादन को उठी नौजवान की आँखों ने बग़ल में बैटी राजकुमारी से इशारों ही इशारों में पूछा - कौन?..........

शेष कथा जानने को यह किताब ज़ुरूर पढिये। अगर आपको संस्कृत नहीं आती तो कोई बात नहीं। हमने इस कहानी को हिन्दी-लिपि में भी छाप दिया है। यानी अस्ल उर्दू कहानी को नागरी-लिपि से परिवर्तित कर दिया है।