We welcomes to Scholars for such kind of translation works.

Translated Works Series. Series-1


  • KARNA-BHARAM
  • (Translated from Urdu into Sanskrit)
  • Sanskrit Drama by Bhas
  • Translation: Dr. Shaikh Ab'dul ghani
  • First Edition: 2015 A.D.
  • Introduction 10, + 38 Pages. (P.B.)
  • ISBN: 978-81-906145-5-9
Price: 60/- (Published from Institute)

संस्कृत-अदब की वह पहली किताब कौन थी जिसे उर्दू का जामः पहनाया गया? सुबूत ओ मसाइल की ग़ैरमौजूदगी में हम यह तो बयाँ नहीं कर सकते लेकिन कुछ उन क़दीमतर किताबात की ओर इशारः कर सकते हैं जिन्हें उर्दू के रंग ओ बू में उतारा गया। चूँकि मत्न संस्कृत-अदब का एक ड्रामः है इस लिहाज़ से हम संस्कृत के उस क़दीमतर ड्रामः को नाज़िरीन के सामने रखेंगे जिसे पहली बार उर्दू में तराशा गया - यह ड्रामः है ‘शकुन्तला’ या’नी संस्कृत-अदब के शायर-ए-लाजवाल महाकवि कालिदास का अदीमुल्-मिसाल ओ दुनिया भर में शोहरतयाफ्तः ड्रामः ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ जिसके तर्ज़ुमे दुनिया भर की ज़बाँ में हुए।

अगर्चः कि इब्तिदा-ए-उर्दू-तर्ज़ुमः-ए-संस्कृत-अदब तक़रीबन यहीं से, और इसी सिन से शुरू होती है फिर भी इसकी रवायत बीसवीं सदी में ही देखने को मिलती है। उन्नीसवीं सदी के आख़िरी सिनीन से लेकर बीसवीं सदी तक और आज तक अदबीयात-ए-संस्कृत का सिलसिलः-ए-उर्दू-तर्ज़ुमः बदस्तूर जारी है।

इसी बदस्तूर सिलसिलः की रवाई में क़दीमतर संस्कृत-ड्रामःनिगार महाकवि भास के तेरह नाटकों में एक ‘कर्णभारम्’ जो कि अदबी हलक़े में काफ़ी पसंदीदा और मशहूर है, -का उर्दू-तर्ज़ुमः आपकी ख़िदमत में पेश है। महाकवि भास संस्कृत-अदब के पहले ड्राम:-निगार हैं जिनके तेरह ड्रामे दस्तयाब हैं। इनका सने तसनीफ 600 क़ब्ले मसीह माना जाता है।

महाभारत में एक मश्हूर-ओ-मारूफ़ किरदार कौरव फ़ौज के सिपहसालार कर्ण का है जो अपनी सख़ावत, बहादुरी और शुजाअत के लिए मशहूर है। अपनी हिफ़ाज़त के लिए हासिल क़ुदरती ज़ीन और ज़ेवर को भी जान की परवाह किए बगै़र कर्ण ब्राह्मण के भेस में आए हुए इंद्र को दान देते हैं जो कि उनकी सख़ावत की इंतिहा है। और यही वजह है कि महाभारत में कर्ण के किरदार की अहमियत को देखते हुए भास ने इसके एक किरदार को लेकर मुस्तक़िल ड्रामा पेश किया।

संस्कृत में ड्रामा की दस अक़साम हैं। ड्रामा को रूपक कहा जाता है। उसकी एक क़िस्म एकबाबी ड्रामा भी है जिसमें मुख़्तसर क़िस्स: को बहुत ही पुरअसर अंदाज़ में आसान अस्लूब के साथ पेश किया जाता है।

महाकवि भास की ड्रामा निगारी और संस्कृत ड्रामा की रूह से उर्दू-दां तबक़ा को मुतआरिफ़ करवाने की ग़रज़ से इसका उर्दू तर्जुमा पेश किया गया है ताकि ये हमारी मुश्तरिका तहज़ीब व तमद्दुन व लिसानी यकजहती की मिसाल बने।

कर्णभारम्’ के मुतर्जिम जनाब डॉक्टर शैख़ अब्दुल ग़नी साहब को संस्कृत और उर्दू दोनों पर एक सा अख़्तियार है। उर्दू उन्हें विरासत और संस्कृत; तालीम से मिली है।

Scholars' opinions/critics on the publication