‘अखिल भारतीय मुस्लिम‑संस्कृत संरक्षण एवं प्राच्य शोध संस्थान’

‘प्रत्नकीर्ति’ : संस्थान की त्रैमासिक शोध-पत्रिका

‘प्रत्नकीर्ति’ संस्थान द्वारा अन्तरजाल पर प्रकाशित; एक व्यवस्थित सम्पादक‑मण्डल के अध्यधीन शोध‑त्रैमासिक पत्रिका है जिसमें संस्थान के उद्देश्यों के अन्तर्गत आने वाले प्राच्य‑विद्या एवं विषयों से सम्बन्धित ऐतिहासिक तथा पुरातात्त्विक महत्त्व एवं मूल्यों के गम्भीर शोधलेख प्रकाशित किये जाते हैं। निम्नलिखित विषयों के अधीन या अध्यधीन किये गए गम्भीर शोध‑अनुसन्धान कार्यों का ‘प्रत्नकीर्ति’ सहर्ष स्वागत करती है ‑

  1. संस्कृत‑वाङ्मय के अज्ञात, अल्पज्ञात, अनुपलब्ध‑प्राय ग्रन्थ और उनकी पाण्डुलिपियाँ।
  2. संस्कृत के प्राचीन अभिलेख, शिलालेख, पादुका‑लेख, भित्तिलेख, ताम्रपत्र, दानपत्र, भूर्जपत्र, व्यवस्था‑संग्रह, सिक्के, मुद्राएँ, प्रतिमा आदि प्राचीन स्रोत। इनमें प्राप्त तथ्य। तथ्यों का वर्गीकृत अध्ययन, यथा‑ ऐतिहासिक, पुरातात्त्विक, धार्मिक, दार्शनिक, साहित्यिक, सामाजिक, राजनैतिक, कला‑परक आदि। अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष। प्राप्त निष्कर्षों से भारत तथा भारतीय ज्ञान‑विज्ञान की सम्भावित श्रीवृद्धि, दशा एवं दिशा
  3. संस्कृत‑वाङ्मय के ज्ञात‑अज्ञात ग्रन्थों के अनालोचित, अचर्चित तथा उपेक्षित पक्ष एवं तथ्य।
  4. अन्य‑जातीय तथा अन्य‑देशीय विद्वान्, लेखक अथवा स्वतंत्र व्यक्तियों द्वारा संस्कृत‑भाषा, साहित्य एवं वाङ्मय की की गई सेवाओं व उनके तत्परक योगदान का अध्ययन। ऐसे अन्यजातीय अन्यदेशीय संस्कृत‑सेवियों के जीवन‑वृत्त। उनके संस्कृत‑परक कार्यों का परिचय, उपलब्धि, मूल्यांकन।
  5. संस्कृत तथा हिन्दी साहित्य एवं साहित्यशास्त्र के भूले‑बिसरे कवि, लेखक, साहित्यकार, काव्यशास्त्री आचार्य, इतिहासकार, विद्वान् तथा स्वतंत्र अध्येता। इनकी कृतियाँ। कृतियों का परिचय, उपलब्धि/अनुपलब्धि, मूल्यांकन।
  6. विश्व ज्ञान‑विज्ञान एवं संस्कृत वाङ्मय के पारस्परिक आदान‑प्रदान।
  7. संस्कृत में अनूदित भारतीय तथा विदेशी भाषाओं/उपभाषाओं/बोलियों का साहित्य।
  8. भारतीय तथा विदेशी भाषाओं/उपभाषाओं/बोलियों में अनूदित संस्कृत‑साहित्य।
  9. संस्कृत से इतर भाषाओं तथा इतर भाषाओं से संस्कृत में अनुवाद की प्रकृति, सीमा, समस्याएं, उनके समाधान की दशा तथा दिशा आदि।