प्रत्नकीर्तिमपावृणु = कर प्रयत्न; कि पुरखों की थाती, पहुंचे उनकी सन्ततियों तक.

चित्रवीथिका/ रिपोर्ताज़

अध्यक्षीय उद्बोधन : प्रो. भानुशंकर मेहता
लोकार्पण समारोह
अतिथियों का स्वागत : डॉ. शरदिन्दु त्रिपाठी
लोकार्पण समारोह
लोकार्पण समारोह
लोकार्पण समारोह
लोकार्पण समारोह
प्रो. डी. पी. शर्मा
डॉ. शुचिस्मिता पाण्डेय
प्रो. वागीश शास्त्री
मनु शर्मा (कथाकार)
मनु शर्मा (कथाकार)
प्रो. भानुशंकर मेहता
प्रो. डी. पी. शर्मा
प्रो. शमीम अख़्तर
डॉ. शितिकण्ठ मिश्र
प्रो. वागीश शास्त्री
स्वागत-भाषण : प्रताप कुमार मिश्र