‘अखिल भारतीय मुस्लिम‑संस्कृत संरक्षण एवं प्राच्य शोध संस्थान’

संस्थान के बारे में

‘अखिल भारतीय मुस्लिम‑संस्कृत संरक्षण एवं प्राच्य शोध संस्थान’ २००४ ईस्वी को अपने मूर्त अस्तित्त्व में आया। संस्कृत-वाङ्मय के अज्ञात साहित्य एवं उसके विविध अनालोचित पक्षों पर शोध, अनुसन्धान एवं संस्कृत‑शिक्षण सम्बन्धी कार्यों के लिए स्थापित यह संस्थान ‘सर्वविद्या की राजधानी’ काशी में अवस्थित है। अपने युग के तीन प्रख्यात एवं स्वनामधन्य आचार्यों; पण्डित वासुदेव द्विवेदी शास्त्री (काशी), पण्डित सीताराम चतुर्वेदी (काशी), पण्डित सैयदहुसैन शास्त्री (मलीहाबाद‑लखनऊ) तथा पण्डित गुलाम दस्तगीर (मुम्बई) के परामर्श एवं मार्गनिर्देशन में प्राथमिक रूप से इसकी स्थापना हुई। कुछ समय बाद हिन्दी‑हास्य‑परम्परा के त्रिमुनियों में अन्यतम प्रोफेसर कान्तानाथ पाण्डेय (चोंच‑बनारसी) की पुत्री डॉ. शुचिस्मिता पाण्डेय (नागरीप्रचारिणी सभा, काशी) का नेतृत्व इस संस्थान को प्राप्त हुआ और स्वयं उन्हीं के आवास में इसका कार्यालय स्थापित हुआ। पिछले ९ वर्षों से यह संस्थान अपने उद्देश्यों के अनुरूप शोध एवं अनुसन्धान कार्यों में सतत संलग्न है।

संस्थान के बारे में विद्वानों की सम्मतियाँ